Thursday, 19 December 2024

सच और झूट

 झूठे लोगो के सामने झूठी मुस्कान के बदले 

सच्चे लोगो के सामने रोना कई गुना अच्छा होता है 

                                                        P.PATRA

सुन्दर

 कैसा होता जितना सुन्दर चेहरा उतना सुन्दर मन होता 

कैसा होता जितना सुन्दर बात उतना सुन्दर सोच होता 

कैसा होता जितना सुन्दर मन उतना सुन्दर नियत होता 

कैसा होता जितना सुन्दर हसी उतना सुन्दर वजह होता। 


कैसा होता जितना सुन्दर शरीर उतना सुन्दर लिवाज होता 

कैसा होता जितना सुन्दर जीबन उतना सुन्दर आचरण होता 

कैसा होता जितना सुन्दर आंखे उतना सुन्दर नज़र होता 

कैसा होता जितना सुन्दर आप उतना सुन्दर कर्म होता।

 

कैसा होता जितना सुन्दर समय उतना सुन्दर उपयोग होता

कैसा होता जितना सुन्दर समाज उतना सुन्दर सोच होता 

कैसा होता  जितना सुन्दर दोस्त उतना सुन्दर दोस्ती होता 

कैसा होता जितना सुन्दर साथी उतना सुन्दर साथ होता 

                                                                  P.PATRA


Thursday, 16 November 2023

देर

 अब देर हो गई है, 

बिचार, सौक, ज्ञान, 

सब मन मैं दफ़न हो गई है, 

अब देर हो गई है.

                           P.PATRA

Who are you ?

  Who are you? How are you different from others? What makes you different? You are hardworking and capable of thinking about both good and ...