Wednesday, 4 March 2026

Who are you ?

 Who are you? How are you different from others? What makes you different? You are hardworking and capable of thinking about both good and bad. You have the power to change the situation created by others. You are not selfish, and you don't do what others do with you. You think of the improvement, Progress and Happiness. You are a good thinker of a beautiful society. Your presence has a charm that affects others the most. You are the hope of many people. You are a good human being, but not in the eyes of others. P.Patra

Friday, 5 September 2025

प्यार

आज का बिचार : इंसान को इंसान से प्यार नहीं है . इंसान को इंसान के पद और प्रतिष्ठा से प्यार है. जब पद और प्रतिष्ठा मैं कमी आती है तो सम्बन्ध मैं भी कमियां नज़र आती है. सच्चा प्यार वही है जो इंसान को एक साधारण इंसान से हो. पद और प्रतिष्ठा तो जीबन  जीने के एक सहारा केबल है और उसके बिना भी एक साधारण जीबन जीने मैं कोई बुराई नहीं है. P. Patra

Wednesday, 3 September 2025

कुछ पाने से पहले और कुछ पाने के बात।

 बदलाब जीबन का नियम है।  हम चाहे भी तो इसे बदल नहीं सकते। हम इंसान के हात मैं कुछ चीज़े नहीं होते।  परिबर्तन को अपनाने से जीबन सरल और सुन्दर होता है।  मनुष्य कुछ पाने को कठिन परिश्रम करता है।  इससे और कोई उपाय भी नहीं है के हमे जो चाहिये जीबन मैं बो चीज़ हमे  मिले।परिश्रम से मिले फल कम भी हो पर आत्मसंतोष मिलता है और उसका कदर भी होता है।  बिना परिश्रम का फल जैसे कुछ समय तक ही हम को सुख दे सकता है। मनुष्य का ब्यबहार सफलता पाने से पहले और सफलता पानेके बात मैं बहुत अंतर होता है।  सफलता से पहले मनुष्य मनुष्य को मनुष्य जैसा ब्यबहार करता है।  बो भगबान को पूजता है और भगबान के फल के प्रति उसके मन मैं डर रहता है। उसको पता होता है की अगर कुछ गलत की तो भगबान हमसे नाराज़ होंगे।  पर मनुष्य जब कुछ जीबन मैं हासिल कर लेता है तब उसका ब्यबहार मनुष्य और समाज के प्रति बदल जाता है।  बहुत कम लोग दुनिआ मैं सफल होने के बात इंसान बने रहते हैं।  कुछ लोग सफलता के बात इंसान से ऊपर और भगबान से कम खुद को आंकते हैं और यह दुनिआ का ऐसा सच है जिसे हम चाहकर भी झुटला नहीं सकते। समाज के प्रति जो सोच होती है सफलता के पहले वह अब  कहीं खो चूका होता है।  अब इंसान खुद को उन्नत करने मैं अपना समय और पैसा का इस्तेमाल करता है। जो कभी दिन दुखी को देखते ही उनको पैसे दे देताथा अब उनको देख के मुँह मोड़ लेता है।  अब मंदिर की और जाता नहीं , घर मैं आलीशान मंदिर जो बना चूका होता है।  लोग डरने लगते है उससे, जो कभी लोगो के साथ बैठकर मस्ती करता था।  समाज मैं  उसको पुराने पहचान मैं उसको छोटा महसूस करबाता है।  खुद को दूसरोंसे अलग साबित करके अपना बड़ापन देखता है। यह बदलाब आता है कुछ पाने से पहले और कुछ पाने के बात। पर इंसान तो नादान होता है।  कभी न कभी उसको अपनी गलती का पता चल ही जाताहै।  फिर बो जो शांति मान ,प्रतिष्ठा ,धन मैं खोज रहा होता है बो अब लोगो के सेबा मैं , भजन कीर्तन मैं , परोपकार मैं , समाज सेबा मैं आत्मसंतोष लाभ करता है।  P.Patra

Sunday, 24 August 2025

आज के कलम से


 

Race of Life

                                                                Race of Life

  We are running behind in saving

   Costs are running behind us.
We are running behind wishes
Pain is running behind us.
We are running behind success
Struggles are running behind us.
We are running behind in money
Hard work is running behind us.
We are running behind the family
Responsibilities are running behind us.
We are running behind the Degree
Academics are running behind us.
We are running behind peace
Problems are running behind us.

                                                                                                   P.PATRA 

Sunday, 17 August 2025

मन

 "मन साफ़ देखे ना कोई, देते तन साफ़ 

दया ना करे दिन दुखी को, करे प्रभु की जाप"

                                                                                                        P.PATRA

Sunday, 3 August 2025

Priority

 We obtain different kind of helps from friends and relatives during our problem but don't know why financial help is in the top priority among all. 

                                                                                                                                 P. Patra

Who are you ?

  Who are you? How are you different from others? What makes you different? You are hardworking and capable of thinking about both good and ...